RERA Act, 2016 के लागू होने से पहले घर खरीदना जोखिम भरा काम माना जाता था। बिल्डर्स ग्राहकों से पैसा लेने के बाद प्रोजेक्ट में देरी करते थे या उस पैसे को किसी अन्य प्रोजेक्ट में इस्तेमाल कर लेते थे। इससे न सिर्फ ग्राहकों को मानसिक और आर्थिक कष्ट होता था, बल्कि पूरे रियल एस्टेट सेक्टर की छवि भी खराब होती थी।
RERA Act, 2016 इन सभी समस्याओं का समाधान लेकर आया है। इस कानून का उद्देश्य घर खरीदारों की सुरक्षा करना, रियल एस्टेट कारोबार में पारदर्शिता लाना और बिल्डर्स को जवाबदेह बनाना है।
📘 Escrow Account की व्यवस्था – कैसे बचाता है यह घर खरीदारों को?
RERA की धारा 4(2)(l)(D) के अंतर्गत Escrow Account का प्रावधान सबसे महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी कदम है। यह प्रावधान बिल्डर्स को मजबूर करता है कि वे खरीदारों से प्राप्त राशि का दुरुपयोग न करें।
Escrow Account के मुख्य प्रावधान:
- बिल्डर को खरीदार से प्राप्त राशि का 70% हिस्सा एक अलग Escrow Account में जमा करना अनिवार्य है।
- इस राशि का उपयोग केवल उसी प्रोजेक्ट के निर्माण कार्यों के लिए किया जा सकता है।
- किसी अन्य प्रोजेक्ट, लोन चुकाने या निजी उपयोग में इस पैसे का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित है।
🔐 खरीदारों को कैसे मिलती है सुरक्षा?
- Escrow Account में रखे गए पैसे की मोनिटरिंग नियमित रूप से होती है।
- भुगतान तभी निकाला जा सकता है जब इंजीनियर, आर्किटेक्ट और चार्टर्ड अकाउंटेंट की स्वीकृति प्राप्त हो।
- इससे यह सुनिश्चित होता है कि बिल्डर द्वारा पैसा सही दिशा में और उचित कार्यों के लिए ही उपयोग किया जा रहा है।
⚖️ RERA उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई:
यदि कोई बिल्डर Escrow Account की राशि का गलत इस्तेमाल करता है तो यह RERA Act का उल्लंघन माना जाता है। ऐसे में:
- RERA प्राधिकरण बिल्डर के खिलाफ जुर्माना, लाइसेंस रद्द, या कानूनी कार्यवाही कर सकता है।
- गंभीर मामलों में कारावास की सजा भी हो सकती है।
📌 निष्कर्ष:
RERA Act ने रियल एस्टेट उद्योग में विश्वास को पुनः स्थापित किया है। Escrow Account जैसी पारदर्शी व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि घर खरीदारों का पैसा सुरक्षित है और वह सिर्फ उसी प्रोजेक्ट के विकास में खर्च होगा जिसमें निवेश किया गया है। इस तरह, यह कानून घर खरीदने वालों के लिए एक सशक्त कानूनी कवच बनकर उभरा है।